Haryana: जींद में गुपचुप करवाया 23 हफ्ते का गर्भपात, पीएनडीटी टीम की रेड, पुलिस ने दर्ज किया केस

जींद शहर के एक निजी अस्पताल में स्वास्थ्य विभाग की पीएनडीटी (Pre-Natal Diagnostic Techniques) टीम ने रेड कर अवैध तरीके से 23 सप्ताह के गर्भपात का मामला उजागर किया है। यह रेड जिले में घटते लिंगानुपात की स्थिति पर नजर रखते हुए की गई, जहां स्वास्थ्य विभाग गर्भवती महिलाओं की मॉनिटरिंग कर रहा है। विभाग को मुख्यालय से सूचना मिली थी कि शशी शर्मा अस्पताल में एक महिला का 23 सप्ताह का गर्भपात अवैध रूप से करवाया गया है, जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए टीम ने अस्पताल में जांच की। इस दौरान पाया गया कि अस्पताल के पास 20 सप्ताह तक के गर्भपात की अनुमति थी, जबकि 23 सप्ताह के गर्भपात के लिए कोई वैध अनुमति नहीं ली गई थी।
जांच में सामने आई नियमों की अनदेखी
स्वास्थ्य विभाग की जांच में सामने आया कि गर्भपात करवाने से पूर्व स्वास्थ्य विभाग द्वारा गठित तीन सदस्यीय कमेटी की अनुमति आवश्यक होती है, लेकिन इस मामले में अस्पताल प्रबंधन द्वारा केवल दो सदस्यों की अनुमति ली गई थी। अस्पताल संचालिका शशी शर्मा से जब दस्तावेज मांगे गए, तो उनके पास 20 सप्ताह तक के गर्भपात की ही स्वीकृति थी। इस पर अस्पताल संचालिका ने कहा कि महिला के पेट में ही बच्चे की मौत हो गई थी और महिला की तबीयत न बिगड़े, इसके लिए जल्द गर्भपात करना आवश्यक था। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया कि गर्भ में मृत बच्चा लड़का था, जिससे मामले में पीएनडीटी एक्ट के उल्लंघन की आशंका और गहरी हो गई है।

पुलिस ने दर्ज किया केस, शुरू की जांच
स्वास्थ्य विभाग की टीम ने इस पूरे मामले की शिकायत शहर थाना पुलिस को दी, जिस पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस द्वारा अस्पताल प्रबंधन से सभी दस्तावेज और घटना की वास्तविक जानकारी मांगी गई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि गर्भपात किस परिस्थिति में और किन नियमों के तहत किया गया। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि कहीं यह गर्भपात लिंग जांच के बाद तो नहीं करवाया गया। मामले में अस्पताल संचालिका और अन्य कर्मचारियों से पूछताछ की जा रही है ताकि इस अवैध गर्भपात के पीछे की सच्चाई सामने लाई जा सके।
घटते लिंगानुपात पर स्वास्थ्य विभाग की कड़ी नजर
जिले में लगातार घटते लिंगानुपात को लेकर स्वास्थ्य विभाग पहले से ही सतर्क है और समय-समय पर निजी अस्पतालों में गर्भवती महिलाओं के इलाज और गर्भपात के मामलों की जांच की जा रही है। पीएनडीटी एक्ट का उल्लंघन करने पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी स्वास्थ्य विभाग द्वारा दी जा चुकी है। इस घटना के बाद जिले में अवैध तरीके से गर्भपात करने वाले अस्पतालों और क्लीनिकों पर शिकंजा कसने की तैयारी की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि बेटियों को बचाने और लिंगानुपात को सामान्य बनाए रखने के लिए इस तरह की कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी, ताकि किसी भी स्तर पर कानून का उल्लंघन कर बेटियों के अधिकारों का हनन न हो सके।